Home » Breaking News » 🔳 देश के सबसे ताकतवर जीएसएलवी-एमके3-डी2 रॉकेट के जरिए भेजा गया सैटेलाइट श्रीहरिकोटा से यह 67वीं लॉन्चिंग, जीसैट-29 देश का 33वां संचार सैटेलाइट …..

🔳 देश के सबसे ताकतवर जीएसएलवी-एमके3-डी2 रॉकेट के जरिए भेजा गया सैटेलाइट श्रीहरिकोटा से यह 67वीं लॉन्चिंग, जीसैट-29 देश का 33वां संचार सैटेलाइट …..

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बुधवार को गाजा तूफान के खतरे की आशंका के बावजूद आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा से संचार उपग्रह जीसैट-29 का सफल प्रक्षेपण किया। 3,423 किलोग्राम के इस उपग्रह को इसरो के सबसे ताकतवर रॉकेट जीएसएलवी-एमके3-डी2 के जरिए श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया गया। जीसैट-29 शाम 5:08 बजे लॉन्च किया गया। यह श्रीहरिकोटा से लॉन्च हुआ 67वां और भारत का 33वां संचार सैटेलाइट है। कश्मीर में बढ़ेगी इंटरनेट कनेक्टिविटी
इसरो के जीसैट-29 की लॉन्चिंग भारत के लिए काफी अहम मानी जा रही है। इससे जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर के दूर-दराज के इलाकों में इंटरनेट पहुंचाने में मदद मिलेगी। उपग्रह में यूनिक किस्म का हाई रिजॉल्यूशन कैमरा लगा है। इसे जियो आई नाम दिया गया है। इससे हिंद महासागर में जहाजों पर भी निगरानी की जा सकेगी। जीएसएलवी एमके से ही लॉन्च होगा चंद्रयान-2 मिशन
जीएसएलवी 641 टन वजनी रॉकेट है। इसका वजन यात्रियों से भरे पांच विमानों के बराबर है। यह 43 मीटर ऊंचा है, यानी 13 मंजिला इमारत के बराबर। यह 15 साल में तैयार हुआ है। इससे होने वाली हर लॉन्चिंग की लागत 300 करोड़ रुपए आती है। 2019 में लॉन्च होने वाले चंद्रयान-2 और 2022 से पहले भेजे जाने वाले गगनयान में इसी रॉकेट का इस्तेमाल होगा ।

इसरो के सबसे ताकतवर रॉकेट जीएसएलवी-एमके3-डी2 के जरिए श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से 5: 08 बजे लांच किया गया। इस मौके पर इसरो के चेयरमैन के. सिवान ने कहा कि यह विशेष उपग्रह भारत में दूरस्थ स्थान पर सेवाएं प्रदान करने जा रहा है। खासकर भारत सरकार के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर भारत में ये अपनी सेवाएं प्रदान करेगा।

सबसे भारी उपग्रह
इस रॉकेट में दुनिया के दूसरे सबसे बड़े बूस्टर एस 200 का इस्तेमाल किया गया है 3423 किलोग्राम वजन का यह भारत की जमीन से लांच सबसे भारी उपग्रह ट है लांच होने के बाद पृथ्वी से 36,000 किमी दूर जियो स्टेशनरी ऑर्बिट में इसे स्थापित किया गया श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किए जाने वाला 76वां और स्वदेश निर्मित 33वां संचार उपग्रह है

हाई स्पीड डाटा ट्रांसफर
इसमें ‘का एवं कु’ बैंड के ट्रांसपोंडर लगे हुए हैं, इससे संचार जरूरते पूरी होंगी
यह भारत के दूरदराज के क्षेत्रों में हाई स्पीड डाटा को ट्रांसफर करने में मदद करेगा

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