Home » Home » 🔳 हाई स्कूल की कुव्यवस्था से स्कूली बच्चे होते परेशान, जांच के लिए नहीं आती कोई अधिकारी…

🔳 हाई स्कूल की कुव्यवस्था से स्कूली बच्चे होते परेशान, जांच के लिए नहीं आती कोई अधिकारी…

  • समस्तीपुर (धर्म विजय प्रसाद गुप्ता  ) :  जिले के  प्रखंड खानपुर भानपुर उत्कर्मित उच्च विद्यालय की   व्यवस्था ऐसी है कि वहाँ के  छात्र – छात्राएं बाहर खुले में शौच जाने को मजबूर है। जी हाँ ये है खानपुर प्रखंड के भानपुर हाई स्कूल की चौका देने बाली खबरें।

बताते चलें कि खानपुर प्रखंड के  दिनमणपुर भानपुर में वर्ष 2014 -15 में बना उत्कर्मित उच्च विद्यालय वहाँ के एच एम मनोज कुमार ठाकुर के मनमानी से अध्ययनरत बच्चे सुबिधा को ललायित है। वहीं इस विद्यालय का  निर्माण तो कराया गया, सौचालय भी बनवाया गया, पम्पसेट भी लगवाये गए। लाखों कि टंकी एब्ं नल सेट लगवाये गये। बावजूद इसके पम्प सेट को 4 वर्षो मे एक बार भी नही चालू किया गाया।

जिस कारण हाई स्कूल में बना बाथरुम शौचालय  पानी के बिना बिरान बना हुआ है। करोड़ों के लागत से बड़ा  बिल्डिंग तो बन गया लेकिन स्कूल संस्थापक का हिम्मत नही हुआ की इस विद्यालय में एक चापाकल भी  गरबा सके। यह सिर्फ गिरी हुई मानसिकता को दर्शाता है जो एच एम मनोज कुमार ठाकुर के  दबंग गिरी कहें या अपनी मनमानी । गांव में अच्छी शिक्षा प्राप्त करने के लिये सरकार नई नई तकनिक विकसित कर रही है नई नई योजनायें बना रही है स्कूली बच्चों को सारी सुबिधाएं उपलबध करा रही है बच्चों के मानसिक विकास के  लिये विभिन्न प्रकार कि प्रतियोगिताएं, खेल कूद , और अन्य सुबिधाएं प्रदान कर रही है ।

  1. वही केंद्र और राज्य सरकार ने विभिन्न योजनायें चलाकर भारत स्वच्छता अभियान चला रही है जिसका प्रचार प्रसार का जिम्मा शिक्षकों को दिया गया है लेकिन यह कैसी बिडंबना है कि जो शिक्षक बच्चों को स्वछता का पाठ पढ़ाने का काम कर रहा है और उसके सामने उसके अपने हाई स्कूल के गंदे  बाथरुम पानी की व्यवस्था नही होने से बच्चें बच्चियाँ खुले में सौच करने को बेबस है । यह कितनी शर्म कि बात है एसे विद्यालय के अमर्यादीत प्रधानाचार्य  को अविलम्ब निलम्बित कर देना चाहिए। इसकी जांच पड़ताल में हमारे संबाददाता भानपुर उत्कर्मित उच्च विद्यालय में प्रवेश करते हैं तो बच्चों उन्हे अपनी स्कूल की व्यथा सुनाते है। संबाददाता के पुछे जाने पर कि स्वचालय कहाँ है तो बच्चें स्वचालय के ओर बढ़ते हुए अपने नाक मुह ढक लिया और आगे इसारा करते हुए स्वचालय दिखाता है इस विद्यालय में जितनी स्वचालय है सभी गंदगी से भरा हुआ था । पानी नही डाला गया था पुनः छात्रों से पुछे जाने पर कि इतनी गंदगी क्यूँ लगी हुई है तो बताया जाता है कि सर आज तक इस बिद्यालय में एक भी चापाकल नही गराया।  अगर किसी छात्र छात्राओं का इमरजेन्सी हो जाता है तो उसे गाव से पानी लेके आना परता  है ओर पानी की मात्रा कम होने पर गंदगी साफ नही हो पाती । हम लोगों ने प्रधानाचार्य को इसकी जानकारी बार बार दिया और चापाकल कि मांग किया लेकिन कोई सुनने को तैयार नही है। हमें जब शौचालय जाना होता है तो गाँव से लोटा मे पानी लेके खुले मैदान मे जाते हैं। वही शिक्षक भी हमलोगों से गांव से पानी मंगवाते हैं वही बच्चों का आरोप है कि ईस बिद्यालय में परिभर्मन  के लिये 4 साल से पैसा आता है लेकिन स्कूल प्रधानाचार्य  के  द्वारा हमलोगों को घुमाने के  लिये नही ले जाया जाता है, ना ही छात्रों को समय पे पोशाक राशी  मिली है और ना ही छात्रवृति मिला है।

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